Wednesday, 13 November 2019

कभी भी भस्म नही हुई यादें सुलगती रही ताउम्र गीली लकड़ी की तरह
कड़वा सा कसैला धुआँ
दम घुटाता रहा उड़ा नहीं आसपास मंडराता रहा।

4 comments:

  1. वाह ,बेहद खूबसूरत

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  2. बहुत ही सुंदर लेखन 👌👌

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