Wednesday, 13 November 2019

कभी भी भस्म नही हुई यादें सुलगती रही ताउम्र गीली लकड़ी की तरह
कड़वा सा कसैला धुआँ
दम घुटाता रहा उड़ा नहीं आसपास मंडराता रहा।

Friday, 1 August 2014

चंद लम्हे उतर आए है कागज़ पे तन्हाइयोँ के ,कहाँ तक पीछे भागते रहे परछाइयो के